太陽は銀河系の中では主系列星の一つで、スペクトル型はG2V(金色)である。
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シュレニク・アヴラニ
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मानसून के दस्तक देने की आधिकारिक तिथि पर पारा 41 डिग्री के पार दर्ज किया गया




मानसून की देरी से तप रही राजधानी, सोलह वर्षों में 27 जून सबसे गर्म रहा




उत्तर भारत में लू के आसार, पूर्वोत्तर में बारिश का अलर्ट
नई दिल्ली। उत्तर भारत भीषण गर्मी और लू की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में अगले दो दिन के दौरान भीषण लू चलने की संभावना है। यहां तापमान 40 डिग्री से 43 डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है। पिछले 24 घंटों में देश का सर्वाधिक तापमान हरियाणा के रोहतक में 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राजधानी में 27 जून मानसून आगमन की आधिकारिक तिथि है। इसके बावजूद दिल्ली और आसपास के इलाके से मानसून अभी काफी दूर है। इसका असर मौसम पर देखने को मिल रहा है। मानसून आगमन के दिन सोलह वर्षों में दिल्ली का तापमान सबसे ज्यादा दर्ज किया गया।
शनिवार को मानक वेधशाला सफदरजंग में अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया। दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में शनिवार की सुबह से ही तेज धूप निकली। दिन चढ़ने के साथ धूप और तेज होती गई। धूप के चलते दिन में 11 बजे के बाद से ही लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होने लगा। दोपहर एक-दो बजे लोगों को गर्म हवा के थपेड़ों का भी अहसास हुआ।
हालांकि, बाद में कुछ स्थानों पर हल्के बादलों की आवाजाही हुई। इसके बावजूद मौसम गर्म बना रहा। दिल्ली की मानक वेधशाला सफदरजंग में दिन का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। यह सामान्य से चार डिग्री ज्यादा है। दिल्ली का रिज इलाका सबसे गर्म रहा। यहां पर अधिकतम तापमान 41.9 डिग्री रहा।
महीने में सबसे गर्म रही रात : दिन के साथ-साथ दिल्ली में रात के तापमान में भी इजाफा हुआ है। सफदरजंग मौसम केन्द्र में न्यूनतम तापमान 30.8 डिग्री रिकार्ड किया गया। यह सामान्य से 2.9 डिग्री ज्यादा है। यह इस महीने की सबसे गर्म रात रही। इससे पहले 11 जून को न्यूनतम तापमान 30 डिग्री दर्ज किया गया था। इस महीने में सिर्फ दो दिन ही ऐसे रहे हैं, जब न्यूनतम तापमान 30 या उससे ज्यादा रिकार्ड किया गया।
साफ-सुथरी बनी है हवा : मौसम के अलग-अलग कारकों की वजह से दिल्ली की हवा लगातार साफ-सुथरी बनी है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक शनिवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 रहा। इस स्तर की हवा को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है।
हाथरस की मलाईदार रबड़ी
भारत हमेशा से ही खाने-पीने का शौकीन देश रहा है, जहां हर क्षेत्र के अपने खास व्यंजन हैं। ऐसे ही कुछ खास व्यंजनों से हम आपको रूबरू कराते हैं ‘संडे स्वाद’ कॉलम में। इस बार पेश है हाथरस की रबड़ी। वैसे रबड़ी बनारस के घाट, कान्हा की नगरी मथुरा, राजस्थान से लेकर बंगाल की गलियों तक में मिल जाएगी, पर इस रबड़ी की बात ही अलग है। बता रहे हैं राजेश गौतम


उत्तर प्रदेश के खानपान में हाथरस की एक खास पहचान है, जिसे आज ‘रबड़ी का शहर’ भी कहा जाता है। यहां की रबड़ी को खास पहचान दिलाने में ‘हन्नो लाला रबड़ी वाला’ का बड़ा योगदान है, जहां दूर-दूर से लोग रबड़ी चखने पहुंचते हैं। यहां की रबड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारंपरिक निर्माण कौशल है। शुद्ध दूध को लोहे के बड़े कड़ाहों में घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होकर लच्छेदार मलाई का रूप ले लेता है। इस प्रक्रिया में कृत्रिम मिठास या मिलावट की कोई जगह नहीं होती। यानी दूध की प्राकृतिक मिठास ही इसकी असल पहचान है। हाथरस की रबड़ी अन्य जगहों की तुलना में अधिक मलाईदार व सोंधी होती है, जो इसे खास बनाती है।
शुद्धता से बनी पहचान
बताया जाता है कि 1968 में हर नारायण वार्ष्णेय, जिन्हें ‘हन्नो लाला’ के नाम से जाना जाता है, ने नयागंज में रबड़ी की एक छोटी दुकान शुरू की थी। उनकी शुद्ध और स्वादिष्ट रबड़ी धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर मशहूर हो गई। आज आलम यह है कि सुबह आठ बजे से ही दुकान पर भीड़ लग जाती है। दीवाली, रक्षाबंधन जैसे मौकों पर तो रबड़ी की मांग और बढ़ जाती है। यहां के मिठाई विक्रेता जीतू शर्मा कहते हैं कि मिठाई के क्षेत्र में हाथरस की अपनी अलग पहचान है। जिसमें रबड़ी की अपनी अलग खासियत है। यहां की अधिकांश दुकानों पर रबड़ी बनती है, जिसने सबको अपना मुरीद बना लिया है।
दूसरे शहरों में भी मांग
हाथरस की अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ है रबड़ी। शहर के मुख्य बाजार सुबह से ही दूध और मलाई की खुशबू से महकने लगता है। अब तो यहां का कस्बा मेंडू रबड़ी और खोवे के कारोबार का बड़ा केंद्र बन गया है। यहां के मिठाई व्यापारी खुद दूध खरीदकर शुद्धता बनाए रखते हैं। मेंडू से रोज करीब पांच क्विंटल रबड़ी और खोवा दिल्ली भेजा जाता है, जबकि हाथरस शहर से भी लगभग दो क्विंटल रबड़ी रोज दूसरे शहरों में जाती है। रही बात कीमत की तो यहां 350 रुपये प्रति किलो से लेकर 360 रुपये प्रति किलो तक रबड़ी बिकती है।
साहित्यिक उल्लेख
बंगाल के प्रसिद्ध ग्रंथ चंडीमंगला (14वीं शताब्दी) में रबड़ी का उल्लेख मिलता है। इसमें बताया गया है कि रबड़ी का स्वाद मथुरा से कोलकाता तक पहुंचा। उस समय बंगाल के लोग मथुरा-वृंदावन घूमने आते थे। वहीं से रबड़ी का स्वाद अपने साथ ले गए। इतना ही नहीं, बंगाल में एक गांव का नाम भी रबड़ी ग्राम है।

ライメントを整えるタダーサナであれ、深いリラクゼーションのためのシャヴァーサナであれ、いずれも日々の練習における基本となるポーズです。このリストでは、6人のヨガインストラクターがそれぞれのお気に入りのポーズを選び、その効果や正しいやり方のコツを解説します。
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